" मैंने देखा उन आँखों को बुढ़ापे के दर्द से रोते हुए "
गुरुवार, 10 मई 2012
मैंने देखा उन आँखों को बुढ़ापे के दर्द से रोते हुए
सोमवार, 26 दिसंबर 2011
गुलशन में नहीं लगता, शेहरा में नहीं सजता
गुलशन में नहीं लगता, शेहरा में नहीं सजता,
ले जाऊ कहा तुझको, दिल तू ही बता मुझको
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कोई बुरा ना माने,
मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कोई भी मंदिर अगर बनता है तो उसके इतिहास से आप उसे गलत या सही कह सकते हैं कि क्यों बन रहा है लेकिन एक चीज हम ...