हमसे दूर जाते पानी को रोकने के लिये हमें एक बार फिर पीछे लौटना होगा यानी पानी सँजोने की जाँची-परखी परम्पराओं को फिर से जीवित करना होगा। भारत में पानी के प्रबंधन की परम्पराएँ हजारों वर्ष तक व्यवहार में रही हैं। जल समस्याओं के स्थाई हल निकालने होंगे। पानी के विवेकपूर्ण प्रबंधन हेतु संस्थागत बदलाव भी जरूरी है। यह अत्यंत सतर्कता का समय है।
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