कानपुर के जघन्य हत्याकांड़ में उप्र सरकार कार्रवाई में विफल साबित हुई। अलर्ट के बावजूद विकास का उज्जैन तक पहुंचना‚ सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। तीन महीने पुराने पत्र पर ‘नो एक्शन' और कुख्यात अपराधियों की सूची में ‘विकास' का नाम न होना बताता है कि इस मामले के तार दूर तक जुड़़े हैं। मामले की सीबीआई जांच करा सभी तथ्यों और संरक्षण देने से जुड़़े संबंधों को जगज़ाहिर करना चाहिए।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें