लॉकडाउन के बाद पूरे देश की आÌथक स्थिति चरमरा गई है। छोटे उद्योग–धंधे वाले‚ छोटे पूंजीपति वर्ग‚ कारीगरों के लिए सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। सिर्फ राशन दुकान और फल–सब्जी विक्रेता को छूट दी गई है। क्या दूसरे व्यवसाय करने वाले लोग ‘हवा' पीकर रहते हैंॽ इन लोगों की जमा पूंजी खत्म हो गई है। भूखों मरने और सड़कों पर आने की नौबत आ गई है। मजदूर‚ राजमिस्त्री‚ ऑटो पार्ट्स के दुकानदार‚ वाहन चालक जैसे लोगों का जीवन मुश्किल में है। अब तक के परिणाम से जब तय हो गया है कि लॉकडाउन कोविड–१९ का कोई इलाज‚ हल नहीं है‚ तो सामाजिक दूरी तय कर के सुरक्षा के नियमों के तहत सरकार को अनिवार्य सेवाएं बहाल कर देनी चाहिए।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई बुरा ना माने,
मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कोई भी मंदिर अगर बनता है तो उसके इतिहास से आप उसे गलत या सही कह सकते हैं कि क्यों बन रहा है लेकिन एक चीज हम ...
-
मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कोई भी मंदिर अगर बनता है तो उसके इतिहास से आप उसे गलत या सही कह सकते हैं कि क्यों बन रहा है लेकिन एक चीज हम ...
-
मोदी सरकार ने देश की शिक्षा नीति में लगभग ३४ वर्ष बाद जो भारी और अच्छा बदलाव किया है‚ उस पर सभी के अपने–अपने विचार हो सकते हैं। स्वामी विवेक...
-
आगामी ६ सितम्बर को हांगकांग की ७० सदस्यों वाली विधान परिषद् का चुनाव होना निश्चित है। मगर इस बार का मंजर बिल्कुल अलग होने वाला है। जैसा कि ड...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें