सब कुछ वापस आ सकता है‚ मगर कहते हैं कि बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय भारोत्तोलन खिलाड़ी के. संजीता चानू पर डोपिंग के आरोप लगे थे जबकि चानू शुरू से ही आरोपों को नकार कर खुद को निर्दोष बता रही थीं। आखिरकार‚ पड़ताल से वह डोपिंग के आरोप से मुक्त हुई हैं। इस बात की खुशी है। मगर दुख इस बात का है कि बिना वजह हमारी प्रतिभा को बदनाम किया गया जिससे वह मानसिक पीड़ा का शिकार हुइÈ। कहना न होगा कि खिलाड़़ी किसी प्रतिस्पर्धा की तैयारी में स्वयं को पूरी तरह झोंक देता है।
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