आजकल कोरोना संक्रमितों के अलावा बाकी मरीजों को बहुत परेशानी हो रही है। खुद को और अपने क्लीनिक को सुरक्षित रखने के लिए कई निजी डॉक्टर टालमटोल का रवैया अपनाते हैं। बीमार को अपराधी-सा एहसास कराते हैं। किस मोहल्ले से आए हो, आधार कार्ड दिखाओ, अपनी जांच कराके आओ, चौदह दिन बाद आना, जैसी बातें की जाती हैं। खांसी-छींक आ जाए, फिर तो भगवान ही मालिक है। अगर यही हाल रहा, तो कोरोना से तो लोग कम करेंगे, बाकी बीमारियों से ज्यादा परेशान हो जाएंगे।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें