अभिभावक बच्चों पर उम्मीदों का बोझ लाद देते हैं जबकि बच्चों को अपने सपने पूरे करने देना चाहिए। अब बच्चों को लेकर माता-पिता में संजीदगी कम होती जा रही है। आजकल के व्यस्तता भरे जीवन में हर व्यक्ति के पास समय का अभाव है। ऐसे में लोग बच्चों पर भी उचित ध्यान नहीं दे पाते। उनकी गतिविधियों को नजरअंदाज करते हैं। इससे उनमें संस्कार कम होते जा रहे हैं। जिन बच्चों को उम्मीद से ज्यादा आजादी दी जाती है, वे अक्सर परिजनों के साथ-साथ समाज को भी शर्मसार कर देते हैं। आज बच्चे अपने दादा-दादी, नाना-नानी के पास बैठना पसंद नहीं करते हैं जबकि बड़े-बुजुर्गों से ही बच्चों को संस्कार प्राप्त होते हैं। सभी माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें ताकि समाज में नाम रोशन कर सकें।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई बुरा ना माने,
मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कोई भी मंदिर अगर बनता है तो उसके इतिहास से आप उसे गलत या सही कह सकते हैं कि क्यों बन रहा है लेकिन एक चीज हम ...
-
मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कोई भी मंदिर अगर बनता है तो उसके इतिहास से आप उसे गलत या सही कह सकते हैं कि क्यों बन रहा है लेकिन एक चीज हम ...
-
कोविड़–१९ के प्रकोप का दौर अभी भी जारी ही रहेगा क्योंकि वायरस किसी भी ढंग से कम नहीं हो रहा है। समूचे विश्व में तमाम कोशिशों के बावजूद कोरोन...
-
मोदी सरकार ने देश की शिक्षा नीति में लगभग ३४ वर्ष बाद जो भारी और अच्छा बदलाव किया है‚ उस पर सभी के अपने–अपने विचार हो सकते हैं। स्वामी विवेक...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें