कुछ दिन पूर्व जहां केरल में किसी खुदगर्ज इंसान ने अपने खेल के लिए अनानास के भीतर पटाखे छुपा कर तीन जिंदगियों की जान ली थी। हथनी की‚ उसके बच्चे की व उस भरोसे की जो हथिनी ने हम इंसानों पर दिखाया था। परंतु पटना के दानापुर के जानीपुर में रहने वाले अख्तर इमाम ने मानवता की प्रतिमान दी है। हाथियों के नाम अपना सब कुछ निछावर करने के बाद अब जानीपुर में सब लोग अख्तर को हाथियों वाला कहकर पुकारते हैं क्योंकि उन्होंने अपने हिस्से की लगभग ५ करोड़ रुûपये की जायदाद‚ खेत–खलिहान‚ मकान‚ बैंक बैलेंस‚ सभी दोनों हाथियों–मोती और रानी–के नाम कर दिया है।
शुक्रवार, 12 जून 2020
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई बुरा ना माने,
मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कोई भी मंदिर अगर बनता है तो उसके इतिहास से आप उसे गलत या सही कह सकते हैं कि क्यों बन रहा है लेकिन एक चीज हम ...
-
मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कोई भी मंदिर अगर बनता है तो उसके इतिहास से आप उसे गलत या सही कह सकते हैं कि क्यों बन रहा है लेकिन एक चीज हम ...
-
कोविड-19 महामारी के कारण शिक्षा और स्वास्थ्य के बीच संघर्ष जारी है। असल में, अगले महीने सीबीएसई 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करना चाह रहा...
-
आधार के आने से मनरेगा भुगतान में फायदा देखने को मिला है लेकिन फिर भी कुछ समस्या है जो समझाने की जरूरत है। धीरे से मुआवजे का भुगतान करने से ब...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें