कोरोना काल में बंद सभी पूजा-स्थलों के कपाट प्रार्थनाओं के लिए खुल तो गए हैं, पर नई व्यवस्थाओं को मानते हुए ही भक्तों को अपनी श्रद्धा अर्पित करनी होगी। पूजा-स्थल तो किसी भी धर्म का हो सकता है, लेकिन कोरोना का कोई धर्म नहीं है। भक्तों ने ईश्वर को प्रतीकात्मक रूप से मास्क लगाकर और कोरोना को देवी मानकर उसके प्रकोप से बचने के लिए पूजा-अर्चना तक कर डाली, लेकिन अंधविश्वास की यह बेल भी कोरोना के प्रकोप को रोक न सकी। अनलॉक-1 मेें दर्शन के प्यासे भक्तों की भक्ति की असली परीक्षा होगी। दर्शनार्थियों को कोरोना से बचने के लिए सतर्क रहकर ही पूजा स्थलों में जाना चाहिए।
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