कोरोना अब रौद्र रूप लेती जा रही है। प्रति दिन देश में १० हजार मामले आ रहे हैं‚ जो वाकई चिंता का सबब हैं। कोरोना संक्रमण से इस समय ज्यादा खतरा है। दबी–छुपी जबान में यह भी कहा जाने लगा है कि अब यह सामुदायिक संक्रमण के दौर में चला है। ऐसे में क्या ऐसा नहीं लगता कि धाÌमक स्थलों को खोलने का निर्णय कहीं उल्टा न पड़ जाएॽ क्योंकि सख्ती से किए गए पहले और दूसरे लॉकडाउन से कुछ हद तक संक्रमण पर नियंत्रण था। धÌमक स्थलों को खोलना कोई बुराई नहीं है। परंतु अभी संक्रमण काल तेजी से गतिमान है‚ उसमें ये निर्णय अनुचित लगता है। सरकार को एक बार फिर से अपने निर्णय कीी समीक्षा करनी चाहिए॥
सोमवार, 8 जून 2020
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कोई बुरा ना माने,
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