देश में लाक डाउन संबंधित नियम तो बहुत बना दिए गए हैं‚ परन्तु उन पर अमल कितना होता है यह देखने वाली बात है। पहले की ही तरह कानून आम दिनों में जैसे तोड़े जाते रहे हैं‚ वैसे ही इस दौर में भी टूट रहे हैं। सड़क किनारे मौजूद कानून के रखवाले भी नियम टूटने पर मूकदर्शक बने खड़े रहते हैं। दुकानों पर तय दूरी को ताक पर रख दिया जाता है। जनप्रतिनिधि भी इससे अछूते नहीं हैं। कहीं चुनाव की तैयारियों को लेकर एकत्रित हो रहे हैं तो कोई नाई से बाल कटवा रहा है। जबकि कोरोना महामारी के शुरुûआती समय में ही सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता से यह अपील की थी कि मास्क हर किसी को पहनना होगा। साथ ही सोशल डि़स्टेंसिंग का पालन अनिवार्य है। मगर कई लोगों ने इस निर्देश पर अमल नहीं किया और अब वो सारे लोग कोरोना की चपेट में हैं॥
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई बुरा ना माने,
मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कोई भी मंदिर अगर बनता है तो उसके इतिहास से आप उसे गलत या सही कह सकते हैं कि क्यों बन रहा है लेकिन एक चीज हम ...
-
मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कोई भी मंदिर अगर बनता है तो उसके इतिहास से आप उसे गलत या सही कह सकते हैं कि क्यों बन रहा है लेकिन एक चीज हम ...
-
मोदी सरकार ने देश की शिक्षा नीति में लगभग ३४ वर्ष बाद जो भारी और अच्छा बदलाव किया है‚ उस पर सभी के अपने–अपने विचार हो सकते हैं। स्वामी विवेक...
-
आगामी ६ सितम्बर को हांगकांग की ७० सदस्यों वाली विधान परिषद् का चुनाव होना निश्चित है। मगर इस बार का मंजर बिल्कुल अलग होने वाला है। जैसा कि ड...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें